Sunday, 4 October 2020

चाणक्य की 6 बातें

 



मुझे वह दौलत नहीं चाहिए  जिसके लिए कठोर  यातना सहानी पड़े , या सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े।  


 

 काँटों से और दुष्ट लोगों से बचने के दो उपाय हैं।  पैर में जूते पहनो और उन्हें इतना शर्मसार करो की वो अपना सर उठा ना सकें और आपसे दूर रहें। 



जो अस्वच्छ कपड़े पहनता है।  जिसके दाँत साफ नहीं।  जो बहुत खाता है।  जो कठोर शब्द बोलता है। जो सूर्योदय के बाद उठता है।  उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों न हो , वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जायेगा। 



एक व्यक्ति को चारों वेद और सभी धर्म शास्त्रों का ज्ञान है। लेकिन उसे यदि अपनी आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है , जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा।  



जो बीत गया , सो बीत गया।  अपने हाथ से कोई गलत काम हो गया तो उसकी चिंता छोड़ते हुए वर्तमान को सही तरीके से जी कर भविष्य को संवारना चाहिए।  



अगर कोई साँप जहरीला नहीं है , तब भी उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए।  उसी तरह से कमजोर व्यक्ति को भी हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।  


                                                                                ---- चाणक्य 




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